विश्व योग दिवस: “योग ने मुझे नकरात्मक विचारों से बचाया”

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Image credits: Gadget Freak

21 जून को हर साल योग दिवस मनाया जाता है। यह किसी संस्कृति या विचारधारा को बढ़ावा देने की बात नहीं, बल्कि स्वयं व्को प्रकृति को जानने की एक शैली है जो जीवन में बड़े बदलाव लेकर आती है। यही वजह है की विश्व योग दिवस की घोषणा मानवता की जीत मानी जाती है।

योग को किसी भी व्यायाम या क्रिया से कहीं बढकर माना जाता है। भारत में इसके अभ्यार्थियों को योगी कहा जाता है; योगी को ब्रह्मांड का ज्ञानी और सत्य का जानकार माना जाता है। पर आप और हम योग के अभ्यास से जीवन को कैसे बदल बदल सकते हैं? आइये जानते हैं ऐसी लोगों की कहानी जिन्होंने जीवन के निराशाजनक पड़ावों से निकलने के लिए योग का सहारा लिया-

“बड़े घाटे और बेटी से दूर होने के बाद योग ने मुझे बचाया” 

छह साल पहले मैंने खुद को एक वित्तीय संकट में पाया। मेरे पास कोई बचत नहीं थी, बड़े कर्जों से निपटने की कोशिश में मैं बेघर हो चुकी थी तथा मेरे काबिलियत के अनुसार मुझे कोई स्थाई नौकरी नहीं मिल सकती थी। अपनी बेटी को इस तनाव से बचाने के लिए मैंने उसे अपनी बहन के पास रहने भेज दिया। यह पहली बार था जब मैं और वो अलग रह रहे थे। पर मैं जानती थी मुझे इस मुश्किल से हार नहीं मानना है।

कुछ समय के बाद मुझे एक नौकरी मिली। बेटी को अपने पास मैं अब भी नहीं रख पा रही थी। तब instagram पर मैंने एक योग चैलेंज देखा। ऑफिस के जिम में मैंने इसका अभ्यास शुरू किया और चैलेंज पूरा किया। इसके बाद भी योगाभ्यास को मैंने छोड़ा नहीं।

धीरे धीरे योग से पाई सफलता ने वित्तीय सफलता की आस जगाई। मैंने बचत करना, बजट बनाना, इन्वेस्टमेंट करना आदि सीखा। जल्द ही परिस्थितियां बदलने लगी और मैंने अपनी बेटी को अपने पास बुला लिया।

“डिप्रेशन से गुजरने के बाद योग ने मुझे बचाया”

बचपन से मेरे माता पिता शराबी रहे जिससे मैं भी व्यसन की ओर बढ़ता चला गया। छोटी उम्र से मैं घबराहट और बेचैनी महसूस करने लगा था लेकिन उम्र बढने के साथ यह और भी गंभीर होते चले गये। मैं कई दवाएं लेता था और हर साल इनके डोज़ बढाने का आग्रह करता है। इस बीच अवसाद ने मुझे घेर लिया।

मेरी पत्नी ने मुझे छोड़ दिया, माँ को कैंसर हो गया, प्रिय दोस्त की ड्रग्स से मौत हो गयी तथा भाई-पिता से अनबन रहने लगी। अपने आप को इस हाल में देखने के बाद मैं ईसा मसीह की शरण में गया। पर इसी तीर्थ में मैंने पाया की मुझे बचाने वाला कोई और नहीं बल्कि मैं ही हूँ। तब मैंने योग का अभ्यास शुरू किया।

वीरासन में उर्जा अनुभव करने के बाद शवासन में जब मैंने शान्ति महसूस की तो मैं जान गया की यही वो मसीहा है जिसकी मुझे तलाश थी।

“आत्महत्या के विचारों से योग ने मुझे बचाया”

21 साल की उम्र में मैं अपने बिस्तर पर लेते हुए अपने टाईमटेबल को देख रही थी। व्यस्त जीवनशैली, पैसों की कमी, घर से दूर रहने की मज़बूरी और कई कोशिशों के बाद भी गहरे रिश्ते न बना पाने की असफलता के बीच मैंने पाया की मैं इस दुनिया में न रहने की कल्पना कर रही हूँ। जीवन खत्म करने का कोई तरीका दिमाग में नहीं था लेकिन चाह थी की मैं न रहूँ।

यह बात मैंने अपने दोस्त को बताई। उसने मुझे अपने साथ योग क्लास लेकर जाना शुरू किया। यह क्रिया मेरे लिए इतनी मुश्किल होती थी की मैं और कुछ सोच ही नहीं पाती थी। फिर भी मैंने निश्चय किया की न कभी कोई क्लास छोडूंगी न ही बीच से उठकर जाउंगी। मैंने पाया की मेरे शरीर ने योग को तनाव कम करने, खुश रहने तथा स्वास्थ्य प्रबंधित रखने के लिए उपयोग करना सीख लिया था। जीवन में सक्रात्मकता आने लगी। इसके बाद मैंने एक फ्री थेरेपी सेशन लिया और पाया की मन में सालों पुराना अवसाद बसा हुआ है। योग, ध्यान और दोस्तों की मदद से इससे भी मैंने छुटकारा पाया।