जीवन को जीना है तो अपनी फिलोसफी छोड़िए

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अक्सर यह देखा जाता है कि हम अपनी अपरखी और धारणाओं पर आधारित फिलोसफी बना लेते हैं और लोगों से यह आशा करते हैं कि हमारी फिलोसफी के साथ सहमत हों और हमारी फिलोसफी हमारे मन में प्रमाणित हो।

लेकिन सोचिए क्या हमें सच मिलेगा, जी नहीं। क्योंकि हम तो लोगों से वो सुनना चाहते हैं जोकि हमारी फिलोसफी के अनुसार हो। यदि हम इस दुनिया में सच जानना चाहते हैं, जीवन को सही मायने में जीना चाहते हैं तो सबसे पहले हमें अपनी फिलोसफी से मुक्ति लेनी होगी। फिलोसफी छोड़िए और चल पड़िए इस दुनिया को नए ढ़ंग से जीनें, सुनिए सदगुरू जग्गी वासुदेव की जुबानी –

सौजन्य – www.youtube.com, sadhguru hindi, isha foundation