कब्ज़ से राहत पाने के आयुर्वेदिक नुस्खे

612
constipation-home-treatment
image credits: medical news today

कब्ज़ को आयुर्वेद में विबंध नाम से जाना जाता है। इस रोग का मुख्य कारण शरीर में वात दोष का असंतुलित होना है। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में आहार और जीवनशैली को रोगों का कारण और रोगों का उपचार भी माना जाता है। इस दृष्टि से विबंध एक गंभीर रोग है जो कई और रोगों को भी जन्म दे सकता है। (kabz ke liye ayurvedic dawa medicine foor constipation in hindi, kabj ka desi ilaj)

 

भारत में हुए एक सर्वे के अनुसार 14 प्रतिशत लोग गंभीर कब्ज़ के शिकार हैं तथा इन्हें जल्द से जल्द  उपचार की ज़रूरत है। फिर भी लोग अक्सर कब्ज़ को मामूली समस्या समझने की भूल करते हैं। अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं, तो इसके निवारण के उपाय जानें-

 

मलबद्धता सही करें 

मलबद्धता ही अपच का सीधा कारण है जिसे ठीक कर आप कभी-कभार होने वाले विबंध से निजात पा सकते हैं। इसके लिए आप गुनगुने पानी में नींबू के रस और शहद को मिलाकर पी सकते हैं। नींबू पाचन क्रिया को बेहतर करने में मदद करता है तथा शरीर से विषाक्त तत्वों को बाहर करता है। इसी तरह शहद पेय का स्वाद बेहतर करने के साथ पाचन सुचारू करता है। गुनगुना पानी भी मल के प्रवाह को आसान बनाने में मदद करेगा।

 

इस पेय को आप सुबह खाली पेट ले सकते हैं। आप चाहें तो शहद की जगह नमक भी मिला सकते हैं ; यह आँतों की सफाई करने में मदद करेगा।

 

त्रिफला 

अगर आपको अक्सर अपच की समस्या रहने लगी है तो त्रिफला आजमाएँ। यह तीन तरह के फलों के चूर्ण का मिश्रण है जिसे विभिन्न तरीकों के रोगों के निवारण के लिए उपयोग किया जाता है। इसका एक मुख्य घटक है हरड जो एक बेहतरीन पाचक है। यह कीटाणु विरोधी और फफूंद विरोधी भी है तथा संक्रमण से रक्षा करता है।

 

त्रिफला आपको टेबलेट या चूर्ण के रूप में किसी भी दवाई की दुकान पर मिल जाएगा। आप चाहें तो एक अनुभवी वैध से परामर्श लेकर अपने लिए विशेष तौर पर तैयार किया गया त्रिफला चूर्ण भी ले सकते हैं। इसे रात में सोते समय गुनगुने पानी में घोलकर लें। अगर आपको इसके स्वाद की वजह से इसके सेवन में तकलीफ हो रही है तो पानी में शहद मिलाकर पीने की कोशिश करें।

 

तेल का उपयोग 

पानी के अलावा तेल और घी भी आहार के सही प्रवाह में मदद कर सकता है। इसी वजह से खाने में एक चम्मच घी मिलाकर खाने की सलाह दी जाती है। अगर आप घी नहीं ले सकते तो अरंडी का तेल या ओलिव आयल भी अपना सकते हैं। ये दोनों ही तेल सुपाच्य होते हैं और आँतों में आहार के प्रवाह को बेहतर करने के साथ इन्हें साफ़ भी करते हैं।

 

फाइबर लें 

एक व्यस्क को दिन में 25-35 ग्राम फाइबर ज़रूर लेना चाहिए। ऐसा करना मल के प्रवाह में मददगार साबित होता है तथा शौच को आसान बनाता है। अपच की समस्या होने पर अपनी खुराक पर ध्यान नहीं; कहीं आपके खाने में फाइबर की कमी तो नहीं है ? दालें, दलिया, अलसी, चिया आदि फाइबर से भरपूर होते हैं और पाचन में मदद करते हैं। किशमिश खाकर भी आप ये फायदे पा सकते हैं। इन्हें पानी में भिगोएँ और अच्छी तरह चबा कर खाएँ।

इसके अलावा आपको खाने में भरपूर सब्जियां भी लेनी चाहिए। ध्यान रखें, फाइबर के साथ आपको भरपूर पानी भी लेना चाहिए ताकि मल का प्रवाह सही रहे।

 

सोडा का उपयोग 

अपच से निजात दिलाने के लिए आप सोडा का सेवन भी कर सकते हैं। इसमें मौजूद बाईकारबोनिट पेट के अम्ल के साथ मिलकर नमक, कार्बनडाइऑक्साइड और पानी का निर्माण करता है। इनकी मदद से आपके मल का प्रवाह बेहतर होता है तथा आंतें भी साफ़ होती हैं।

 

इस उपाय के लिए आप बाज़ार में मिलने वाले सोडा के मिश्रण का उपयोग कर सकते हैं। आप चाहें तो 1/4 कप गुनगुने पानी में 1 चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर भी ले सकते हैं। यह मिश्रण अपच के अलावा एसिडिटी और पेट से भी आराम देगा। ध्यान रखें, आधे कप से ज्यादा सोडा का सेवन न करें।

 

सही आहार 

सही आहार और जीवनशैली ही सभी रोगों की अचूक दवा है। अपच से राहत पाने के लिए आपको पूरक आहार अपनाना चाहिए। अपनी थाली में बहुत सारा आलू, मैदा, मांस और पनीर न लें। इसकी जगह दाल, सब्जियां, दूध, घी, अदरक का रस/चटनी आदि को दें।

कोशिश करें की खाना खाते हुए आप आहार पर पूरा ध्यान दें। खाना अच्छी तरह चबाएं, ज़रूरत लगने पर थोडा पानी लें तथा खाना खाने के बाद आधा घंटा टहलें। ये सभी तरीके आपके शरीर को सही पाचन और पोषण का पूर्ण अवशोषण करने में मदद करेंगे।