सर्रोगेसी है उपाय उन महिलाओं के लिए जो किसी कारणवश मां बनने में हैं असमर्थ

4535
surrogacy
image credits: stayathomemum.com.au

Surrogacy का अर्थ होता हैं जब कोई अन्य महिला अपनी कोख में बच्चें को नौ महीने तक संभालती हैं। तथा नौ महीने होने के बाद वह उस बच्चे को जन्म भी देती है, लेकिन बच्चा हो जाने के बाद वह महिला बच्चे को उन दंपत्ती को सौंप देती हैं जो बच्चा चाहने की आशा रखतें हैं। आजकल पूरे विश्व में इसका चलन हो गया है। तथा जैसे जैसे इसका चलन बढ़ रहा हैं, लोगों में इसको लेकर जिज्ञासा भी बढ़ती जा रही है।

यदि आप Surrogacy करवाना चाहते हैं, तो आपको एक बार कानूनी कारवाई तथा परामर्श करना आवश्यक होता है। Surrogacy उन स्थितियों में ही उपयुक्त होता हैं यदि आपकी चिकित्सीय हालत ही ऐसी है कि आप बच्चा पैदा करने में असमर्थ हैं अथवा यदि आपने बच्चे को जन्म दिया तो वह स्थिति आपके लिए खतरनाक हो सकती हैं। कभी कभी आपके शरीर में गर्भ की अनुपस्थिती अथवा गर्भ के भ्रष्ट रचना होने के कारण भी आप अपने आप को गर्भवती नहीं बना पाते। Surrogacy कितनी हद तक सफल होता हैं यह कहना या निर्धारित करना थोङा मुश्किल होता हैं। उसके भी कई आवश्यक तत्व होते हैं जिनका जानना बहुत ही जरुरी हैं।

1) जो महिला Surrogate माँ है उसमें गर्भवती हो पाने की क्षमता है या नहीं।

2) अंङा दान करनेवाली की सही उम्र का पता लगाना बहुत ही जरुरी हैं।

3) विभिन्न प्रक्रियाओं (IUI तथा IVF) का सफल होना।

Surrogacy की प्रक्रिया को करने से पहले आप को एक दूसरे के साथ इस बारे में परामर्श अवश्य ही कर लेना चाहिए। तथा किसी को भी कोई शंका ना हो, इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए।

Surrogacy की चिकित्सा को शुरू करने से पहले आपको उसपर होनेवाले खर्च की आवश्यक जानकारी होनी चाहिए। पहले आपको अपने चिकित्सक से सलाह लेकर अपनी जाँच करवा लेनी चाहिए। तथा उसके पश्चात ही सरोगेट माँ की खोज करनी चाहिए। आप एक ऐसी महिला पाना चाहेंगे जो एक स्वस्थ्य तथा सुरक्षित प्रकार से बच्चे को जन्म दे सके। इसके लिए बहुत ही जरुरी है कि आप Surrogate माँ के साथ साथ अपने संबंध विश्वसनीय बनाए रखें। बच्चा हो जाने के बाद जब आप सरोगेट माँ से बच्चा लेते हैं, तो उसके पहले आपको उपयुक्त रूप से कानूनी व्यवस्था करके सारी तैयारियाँ कर लेनी चाहिए। ताकि आप उस बच्चे के कानूनी रूप से माँ बाप के रूप में जाने जा सके।

इसे भी पढ़ें –

  1. गर्भावस्था – मातृत्व का पहला चरण, बरतें सावधानियां, अपनाएं यह आयुर्वेदिक उपचार
  2. प्रेगनेंसी के दौरान शिशु में पनपने वाले जन्मदोष
  3. इस तरह कहें प्रेगनेसी के दौरान होने वाले स्ट्रैच मार्क्स को गुडबॉय
  4. क्या आपके मां बनने के रास्ते में आ रहीं हैं रूकावटें