इन 5 तरीकों से बढ़ाएं मानसिक शक्ति और करें मनचाहे काम पर केंद्रित

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image credits: Bank of Cardiff

मानसिक स्वास्थ्य की बात करें तो अक्सर हम मनोरोगों से बचने के उपायों पर ही ध्यान देते हैं तथा इस कोशिश में मानसिक शक्ति बढाने की कोशिश नहीं करते। मानसिक शक्ति हम अपनी भावनाओं को समझने, विचारों को काबू में रखने, परिस्थितियों से परे रहकर सकरात्मक सोच रखने आदि की क्षमता को मानते हैं ये सभी मान्यताएं आपको अपने आदर्शों के साथ जीने में मदद करती हैं जिससे आप आत्मविश्वास पाते हैं तथा दुनिया में अपनी अलग पहचान बना पाते हैं।

 

तो आइये जानते हैं कैसे अपनी मानसिक शक्तियों को बढ़ाकर आप सफलता की परिभाषा खुद गढ़ सकते हैं-

 

  1. अपने मूल आदर्शों को परखें 

हम सभी ने अपने जीवन में कुछ आदर्शों को अपनाया है। ये समय के साथ बने मूल आदर्श हमारे अनुभवों पर ही निर्भर करते हैं तथा आपके विचारों, व्यवहार और भावनाओं का ढांचा तैयार करते हैं।

कई बार हमारे मूल आदर्श थोड़े गलत या निष्फल होते हैं। उदाहरण के लिए- कई बार हम मान बैठते हैं की हम बड़ी नौकरियों के लायक नहीं है या कला हमारे समझ के बाहर की बात है। ऐसे आदर्श आपको कोशिश करने से रोक देते हैं तथा आपके भविष्य का निर्धारण ऐसी ग़लतफहमी पर ही हो जाता है।

इसलिए हमेशा अपने आदर्शों को पहचानें तथा इन्हें तौलते रहें। आदर्शों को बदलना इतना आसान नहीं होता, पर अगर आप संकल्प कर लें तो इन्हें बदलकर जीवन की दिशा तक बदली जा सकती है।

 

2. अपनी मानसिक ऊर्जा समझदारी से खर्च करें 

जिन चीज़ों पर आपका नियन्त्रण नहीं है, अगर उनके बारे में आप लगातार सोचते रहेंगे तो आप महत्वपूर्ण ऊर्जा गंवा बैठेंगे। जिन समस्याओं को आप सुलझा नहीं सकते उन्हें जल्द पहचानने का अभ्यास करें तथा बची हुई उर्जा को कलात्मक गतिविधियों में लगाएं। हमेशा उन्हीं बातों पर ध्यान लगाएं जो आपके नियन्त्रण में हैं।

अपनी मानसिक ऊर्जा को एक तरह की सोच से हटाकर दूसरे में लगाना भी अभ्यास से ही संभव है। सिर्फ कुछ ही दिन सचेत होकर यह कोशिश करें और जल्द लाभ पाएं।

 

3. नकरात्मक सोच को सक्रात्मकता से बदलें 

सोच के ज़रिये काम करने की आदत में अक्सर हम अपनी सोच की आदतों पर ही ध्यान नहीं देते। दिनभर आपका दिमाग खुद से कैसी बातें कह रहा है यह अगर समझ लिया जाए तो आप अपनी किस्मत को काफी हद तक अपने नियंत्रण में ला सकते हैं। ध्यान दें, कहीं आप-“मैं कभी कुछ सही नहीं कर सकती” या “मुझ जैसा आलसी व्यक्ति इसी परिणाम के काबिल है” जैसे वाक्य तो खुद से नहीं कह रहे?ऐसे विचार आपको मानसिक चक्रव्यूह में फसाकर आगे बढने से रोक देते हैं।

ऐसे विचारों को पहचानें और इनकी जगह सकरात्मक विचारों को दें।

 

4. असहजता को सहने का अभ्यास करें 

मानसिक तौर पर ताकतवर होने का मतलब यह नहीं की आप भावनाओं से मुक्त हो जाएंगे। बल्कि, ताकतवर होने पर आप भावनाओं के प्रति और भी सजग हो जाएंगे तथा इन्हें नियंत्रित भी कर पाएँगे। कई बार आपको विरोधी भावनाओं के महसूस होने पर भी आगे बढने की कोशिश करनी होगी। हो सकता है की घबराहट आपको नए अवसरों की ओर जाने से रोकें। ऐसे में आपको असहज होते हुए भी आगे बढने की कोशिश करनी होगी।

समय-समय पर भावनाओं के विरुद्ध छोटी-बड़ी गतिविधियाँ करने का अभ्यास करें। यह आपको जीवन की मुश्किलों से निपटने में मदद करेंगे।

 

5. रोजाना अपनी प्रगति पर ध्यान दें 

हम रोज़ सफल होने के प्रयास में अपना पूरा समय झोंक देते हैं लेकिन इस प्रगति पर ध्यान देने तथा इसके प्रति जागरूकता नहीं दिखाते। दिन के अंत में खुद से पूछें की आपने अपने व्यवहार, भावनाओं और विचारों के बारे में क्या सीखा। यह भी सोचें की आप अगले दिन क्या पाना चाहते हैं।

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