गर्भपात के बाद भावनात्मक आघात से ऐसे उबरें 

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गर्भपात एक बेहद दुखद अनुभव है और इस मुश्किल समय में हम आपके साथ हैं। यह समय आपका अपने आप से जुड़ने तथा दुःख मनाकर इसे स्वीकार करने का है। हमेशा याद रखें की इसमें आपकी गलती नहीं है।

इस मुश्किल समय से उबरने में आपकी सहायता के लिए कुछ उपाय यहाँ दिए गये हैं।

गर्भपात के बाद मैं कैसी भावनाएं महसूस कर सकती हूँ?

महिलाएं इस समय कई भावनाएं महसूस कर सकती हैं- सुन्न होना. अविश्वास, गुस्सा, ग्लानी, दुःख, अवसाद और ध्यान लगाने में परेशानी। अगर गर्भ बहुत ही जल्दी गिर गया हो तो भी माँ और शिशु के बीच का गहरा सम्बन्ध कई तरह की भावनाएं ला सकता है।

इसके अलावा महिलाएं कई शारीरिक लक्षण भी महसूस कर सकती हैं। इनमें मुख्य हैं-

  • थकान
  • सोने में मुश्किल
  • ध्यान लगाने में मुश्किल
  • भूख न लगना
  • बार बार रोना आना
  • रिश्तों में कडवाहट आना
  • अपने आप को नुकसान पहुँचाना

इस समय हार्मोनल बदलाव भी इन लक्षणों को बढ़ावा दे सकते हैं।

गर्भपात से उबरने के दौरान कैसा महसूस होता है?

गर्भपात का दुःख आपको तीन चरणों से लेकर जाएगा:

  1. सदमा व् इनकार 

शुरुआती चरण में आप अविश्वास से भरे हो सकते हैं; “यह सम्भव नहीं है” “मैंने अपनी देखभाल अच्छे से की है” तथा “शायद चिकित्सक गलत हैं और मैं अब भी गर्भवती हूँ” जैसे विचार आपके मन में आ सकते हैं। गर्भपात को स्वीकार करना मुश्किल होगा। इस समय चिकित्सक से बात करते हैं तथा लक्षण बताते रहें। उनके द्वारा दिए जा रहे मार्गदर्शन का पालन भी पुरे मन से करें।

2. गुस्सा अवसाद व् ग्लानी 

मेरे साथ ही ऐसा क्यों हुआ, मेरे जीवन में कभी ख़ुशी नहीं आ सकती आदि विचार आपको सता सकते हैं। हो सकता हैं आपको अपने आप पर, चिकित्सक पर, साथी पर व् भगवान पर गुस्सा आए। कभी कभी पहले हुई गलतियाँ इस गुस्से की वजह बन सकती है तथा कई बार साथी का भावनाओं को अलग तरह से व्यक्त करना या चिकित्सक का सम्वेदनशील न होना आपको नाराज़ कर सकता है। ऐसे में खुद को सम्भालें और अपने रिश्तों को बिगड़ने न दें। साथ ही अगर ऐसा हो रहा हो तो इसके खुद को दोष न दें। खुद से प्रेम जताएं तथा आस पास के लोगों से सहानुभूति रखें।

ज्यादातर समय महिलाएं गर्भपात के लिए खुद को दोष देती हैं। इस समय यह जानना ज़रूरी है की यह एक प्राकृतिक घटना है और कई बार सब कुछ सही करने पर भी यह आपके साथ हो सकती है। पहले जो भी हुआ हो, आज खुद को माफ़ करना आपको आगे सुखपूर्वक रहने में मदद करेगा।

3. स्वीकार्यता 

याद रखें आप एक दृढ महिला हैं, आप इस अवस्था से उबर सकती हैं; ठीक उसी तरह जिस तरह कई और महिलाएं इससे गुजरी हैं और आज बेहतर जीवन जी रही हैं। ज़रूरत लगे तो साथी, चिकित्सक या काउंसलर की मदद लें।

किसी चीज़ को स्वीकार कर लेने का अर्थ यह नहीं की आपको उसके होने से कोई फर्क नहीं पड़ता। इसका सिर्फ एक ही अर्थ है- आपने सत्य को स्वीकार लिया है और अब आप आगे बढने के लिए तैयार हैं।

मैं इस क्षति से कैसे उबरुं ?

अपनी ज़रूरतों और सीमाओं को समझें और इन उपायों को अपनाएं-

  • अपने करीबियों से सम्पर्क करें। उनसे उनका प्यार, समझ, सहजता व् सहारा लें।
  • अपने साथी और स्वयम के लिए काउंसलिंग लें। ज़रूरी नहीं की आपको इस मुश्किल वक्त से अकेले गुजरना पड़े।
  • अपने लिए समय निकालें तथा दुःख से निकलने की जल्दी न करें। धीरे धीरे भावनाएं बदलने लगेंगी; इन्हें बदलने का समय दें।