बारिश के मौसम में फिट बने रहने केे लिए करें इन 8 नियमों का पालन

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बचपन की बारिश के वो खुशनुमा वाकये याद हैं आपको?? पानी से भरे गड्ढों में कूदना, कागज़ की नाव चलाना और दोस्तों के साथ बहुत मस्ती करना। पर अब खेलना तो दूर, बारिश के पानी में हल्का भीगना भी गवाँरा नहीं। बेशक बारिश में बीमारियां तेज़ी से फ़ैल रही हैं पर इन्हें अपने और अपने बच्चों के यादगार पलों पर पानी न फेरने दें।

यहाँ दी कुछ सावधानियां बरतें और इस खूबसूरत मौसम का मज़ा लीजिए-

 

  1. पानी से बचाव के साधन का उपयोग करें

मॉनसून में मौसम का अंदाज़ा लगाना आसान नहीं। अपने परिवारजन को आकस्मिक हुई बरसात से बचाने के लिए उनके पास हमेशा रेनकोट तथा ज़रूरी चीज़ों को ढाकने के लिए पन्नी ज़रूर रखें। खुद भी कभी छाते या रेनकोट के बिना घर से न निकलें। फोन, लैपटॉप आदि के लिए वाटरप्रूफ कवर खरीदें। बारिश में पहनने के लिए रबर/वाटरप्रूफ जूते पहने।

 

2. मल्टीविटामिन की खुराक बढ़ाएं

शरीर की रोगों से बचाव करने की क्षमता बढ़ाने के लिए मल्टीविटामिन्स की खुराक बढ़ाएं। विटामिन C तथा E इनमे सबसे महत्वपूर्ण है। विटामिन C जहाँ शरीर के बीमार होने की आशंका घटाता है वहीं  विटामिन E शरीर को बीमारी से उबरने में मदद करता है।

 

3. पोषक आहार लें

सुनिश्चित करें की आपका परिवार सम्पूर्ण संतुलित भोजन ले रहा है जिसमे भरपूर मात्रा में ताज़े फल, सब्ज़ियां, एंटीऑक्सीडेंट,  विटामिन A, B-काम्प्लेक्स, C तथा E मौजूद है। सलाद आदि खाने से बचें। फल-सब्ज़ियों को खाने के पहले अच्छी तरह साफ़ पानी से धोएं। सड़क किनारे मिलने वाले पकोड़े आदि से इस मौसम में तौबा करना ही समझदारी है। अपने पुरे परिवार के लिए रोज़ एक कप हर्बल टी या एक कटोरी वेजिटेबल सूप ज़रूर बनाएं जो शरीर को गर्म रखेगा और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाएगा।

 

4. बारिश में भीगने के बाद नहाएँ

शरीर के तापमान में एक दम से आने वाले बदलाव बीमारी को जन्म देता है। अक्सर हम जब पानी से भीगे होते हैं तो पानी के सूखने के दौरान शरीर का तापमान तेज़ी से गिरने लगता है। साथ ही गीले रहने पर संक्रमण होने की आशंका बढ़ती है। बारिश में भीगने के बाद गुनगुने पानी से ज़रूर नहाएं और स्वयं को अच्छी तरह तौलिए से सुखाएं।

 

5. भरपूर पानी पियें

साफ़ पानी पीने से शरीर बीमारियों से बेहतर तरीके से लड़ पाता है। यह शरीर को साफ़ कर कीटाणुओं को भी बाहर करता है। पानी फिल्टर्ड या उबालकर ठंडा करके ही पिएं। पर पाचन को सुचारु बनाने के लिए बहुत सारा पानी पीने की जगह सुप, काढ़े आदि पियें।

 

6. हाथ साफ़ रखें

गंदे हाथ कीटाणुओं का रास्ता होते हैं। गंदगी ही नहीं बल्कि लोहा या लकड़ी के सम्पर्क में आने पर भी हाथों पर बीमारी करने वाले कारक आ सकते हैं। इसकी वजह बारिश में नमी के कारण लोहे तथा लकड़ी का ख़राब होना है। बच्चे इन कीटाणुओं के सम्पर्क में अक्सर आ जाते हैं इसलिए उनके और अपने हाथ हर 3-4 घंटे में धोते रहें।

 

7. गीली दीवारों से दूर रहें

तेज़ बारिश में खिड़की-दरवाज़े बंद करके नमी को घर में आने से रोकें। दीवारों को सूखने में बहुत वक़्त लग सकता है और इस दौरान इनमे फफूंद पैदा हो सकती है। इस बात का खास ध्यान रखना चाहिए अगर आपके घर में अस्थमा या मधुमेह के मरीज़ हों।

 

8. चीज़ों को स्थिर न रहने दें

अनुपयोगी खाली बर्तन या पानी भरे बर्तन, कूलर, गमले आदि को यूँही न पड़े रहने दें। इन्हे अच्छी तरह साफ़ करते रहें तथा पानी कभी न जमा होने दें। सुनिश्चित करें की आपके आस-पास कहीं भी पानी रुका हुआ न हो। बच्चों को बारिश में खेलने दें पर पानी भरे गड्ढे आदि से दूर रखें। मच्छर/कीट विरोधी क्रीम (रेपेलेंट) लगाकर ही  घर के बाहर जाएं।