नस्य क्रिया से पाएं स्वस्थ नासिका और फेफड़े

304
Image Credits: Banyan Botanicals

नाक को चेतना और स्वास्थ्य का दरवाज़ा माना जाता है। नासिका के शोधन से जुडी दवाएं आपके मन, प्राण, वात, कफ, पित्त और मज्जा धातु को प्रभावित करती हैं। यही वजह है की पंचकर्म में नस्य क्रिया का ख़ास स्थान है।

नहाने या व्यायाम से एक घंटा पहले नस्य क्रिया को खाली पेट किया जाता चाहिए। सर पीछे की ओर लटकाकर सीधा लेते तथा नस्य तेल की पांच बूँदें हर नासिका में डालें। गहरी सांस खीचें तथा एक मिनट तक लेते रहें।

आपको नस्य की ज़रूरत है अगर आपको यह समस्याएं हैं-

  • सर, गर्दन या जबड़े में कसावट
  • सिरदर्द और माइग्रेन
  • साइनस
  • दांत में दर्द तथा ढीलापन
  • गले में खराश
  • आँखों का फड़कना
  • गले में कुछ अटका हुआ महसूस होना
  • बोलने में मुश्किल होना
  • चेहरे का लकवा
  • मोतियाबिंद
  • गोइटर
  • चक्कर आना
  • ट्यूमर होना
  • यौन ऊर्जा में कमी आना

नस्य क्रिया के लाभ और भी ज़्यादा है लेकिन कुछ लोगों के लिए यह वर्जित है-

  • बच्चे
  • बूढ़े
  • गर्भवती माँ
  • माहवारी के समय
  • नहाने के ठीक पहले या बाद में
  • अपच में
  • दस्त होने पर
  • भूखे होने पर
  • प्यासे होने है
  • थके होने पर
  • व्यायाम के आस पास
  • दुःख में
  • तेज़ बुखार में
  • बस्ती के तुरंत बाद
  • नेति के साथ

नस्य के प्रकार

  • विरेचन नस्य में आपके नाक में सूखी जड़ी बूटी का पाउडर डाला जाता है।
  • बृहना नस्य में वात दोष को कम करने के लिए शोधित घी या दूध का उपयोग किया जाता है।
  • शमन नस्य में दोष के अनुसार घी, तेल या काढ़ो का उपयोग होता है।
  • नवां नस्य में रस, तेल और काढ़ो का एक साथ उपयोग होता है।
  • मार्शय नस्य में आप थोड़ा सा तेल ऊँगली पर लेकर नाक में लगाते हैं तथा मालिश करते हैं। इसे आप स्वयं रोज़ाना तथा ज़रूरत के अनुसार कर सकते हैं।