ब्रह्माण्ड की ऊर्जा से जुड़ें नटराजासन के साथ

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Image Credits: Yoga Journal

नटराजासन को नृत्य विद्या में विशेष स्थान प्राप्त है। नृत्य की शुरुआत से पहले इस आसन को कर ब्रह्माण्ड से क्रियात्मक शक्तियां को प्रदान करने की प्रार्थना की जाती है। आप और हम भी इस आसन के अभ्यास से रचनात्मकता बढ़ाने के साथ ही अन्य लाभ पा सकते हैं-

  • कन्धों और छाती को मज़बूत बना सकते हैं।
  • जांघ, कूल्हों और पेट की मांसपेशियों को मज़बूत बना सकते हैं।
  • पेट और टखनों को मज़बूत बना सकते हैं।
  • संतुलन बेहतर कर सकते हैं।

आइये, नटराजासन के अभ्यास की प्रक्रिया जानें-

  1. ताड़ासन में खड़े हो जाएं। गहरी सांस भरें और वज़न को दाएं पैर पर डालें। बाएं पैर के घुटने को मोड़ते हुए एड़ी को कूल्हों से लगाएं। सीधे पैर को मज़बूती के साथ सीधा रखें।
  2. इस आसन को आप तरीके से कर सकते हैं। दोनों की रूपों में धड़ को सीधा रखें। पहले अपने बाएं हाथ को पीछे की ओर ले जाते हुए बाएं टखने को पकड़ने की कोशिश करें। कमर पर बल डालने से बचने के लिए पेडुभाग को नाभि की ओर खीचें।
  3. बाएं पैर को अब ऊपर उठाना शुरू करें। इसे शरीर से दूर और पीछे की तरफ लेकर जाएं। बाई जांघ को ज़मीन से समानांतर कर लें। सीधे हाथ को सामने की तरफ फैलाएं और संतुलन बनाएं।
  4. इसके अलावा आप दाएं हाथ को भी पीछे की और ले जाकर बाएं टखने को पकड़ सकते हैं। इससे छाती और कंधों को अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
  5. इस आसन में बीस से तीस सेकंड बने रहें। फिर पैर की पकड़ छोड़ें और इसे ज़मीन पर रखें। इतनी ही देर के लिए बाएं पैर पर भी आसन का अभ्यास करें।

 

इस आसन को बेहतर रूप से कर पाने के लिए आप पहले वीरासन और धनुरासन का अभ्यास कर सकते हैं। इसे बाद अधो मुख स्वानासन का अभ्यास करें।