पंचकर्म करवाने से पहले यह जानें

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आयुर्वेद में पंचकर्म को एक विशिष्ट विधि माना जाता है जो आपके शरीर और दिमाग से सारे विषाक्त तत्वों को बाहर कर देती है। यह क्रिया बीमारियों के रास्ते को उलटने वाली मानी जाती है और सभी बीमारियों के स्रोत माने जाने वाले पाचन तन्त्र को पूरी तरह दुरुस्त करती है। पर फिर भी कहा जाता है की कमजोर दिल वाले और 18 साल से कम उम्र के व्यक्तियों को यह क्रिया नहीं करवाई जानी चाहिए। (panchakarma treatment benefits and side effects, fayde, laabh, precautions, jaruri jaankari in hindi)

पंचकर्म की पांच क्रियाएँ करवाने से पहले, बाद और दौरान किन बातों को दिमाग में रखना चाहिए, आइये जानें-

 

पंचकर्म से पहले 

पंचकर्म ऐसी प्रक्रिया नहीं जिसमें आपको जल्दबाजी करनी पड़े। यह ज़रूरी है की आपकी नाड़ी और स्नायु तन्त्र विषाक्त तत्व बाहर करने के लिए तैयार हो। इसलिए पंचकर्म करवाने का निश्चय करने के बाद आप 4-8 हफ्तों बाद का अपॉइंटमेंट लें।

पंचकर्म के 2-4 हफ्ते पहले इसके विशेषज्ञ से मिलकर खाने की शैली में बदलाव के बारे में चर्चा करें। साथ ही उनसे क्रिया के दौरान बरती जानी वाली सावधानियाँ और अनुशासन के बारे में भी जानें। आने वाले हफ्तों को इस परामर्श के आधार पर तैयारी करने में लगाएं।

 

पंचकर्म के दौरान 

पंचकर्म के दौरान आप इन पांच क्रियाओं से गुज़रेंगे-

 

वामन: यह क्रिया शरीर में कफ़ दोष के कारण जुटे विषेले तत्वों को बाहर करती है। यह चिकित्सीय तरीके से उलटी करने की प्रक्रिया है जिससे शरीर कफ़ दोष की वजह से हुए रोगों का खात्मा होता है।

विरेचन : वामन क्रिया के 2-7 बाद की जाने वाली इस क्रिया का केंद्र लीवर में पित्त दोष होता है।

बस्ती : बस्ती में शरीर में वात दोष के संतुलन और डेटोक्स के लिए क्रिया की जाती है। ज्यादातर रोग वात दोष के असंतुलन से ही होते हैं।

नास्य : सिर के रोगों के निवारण के लिए नास्य रोग महत्वपूर्ण है। तेल की धार से मस्तिष्क में तनाव और गर्मी को कम किया जाता है जिससे सिरदर्द, माइग्रेन आदि रोगों से निजात मिलती है।

रक्तमोक्षण: नियंत्रित तरीके से शरीर से कुछ रक्त बाहर निकाला जाता है जिससे पित्त दोष संतुलित होता है।

 

पंचकर्म के बाद

पंचकर्म आपके जीवन में बड़ा परिवर्तन ला सकती है। लेकिन इस क्रिया के सम्पन्न होने के बाद कई चीज़ें अनुभव करेंगे-

पहला दिन-अगर आप थका महसूस कर रहे हैं, शरीर में भारीपन और पेट को फुला महसूस कर रहे हैं तो चिंता न करें, यह सामान्य है।

दूसरा तीसरा दिन:  इस दिन आप थोड़ी थकान महसूस कर सकते हैं। आपका लीवर शरीर को साफ़ करने में पहले से ज्यादा काम कर रहा है इसलिए आलस या अनचाहे विचार जैसी चीज़ें भी आप महसूस करेंगे। इस दिन आपको अदरक की चाय पीने और आराम करने की सलाह दी जाती है।

चौथा दिन: इस दिन आप हल्का और खुश महसूस करने लगेंगे। पर इस दिन कोशिशों पर लगाम न लगा दें, हल्का ही खाएँ और रात में पूरी नींद लें। इस दिन भी गुनगुना पानी और चाय लें।

बाकी दिन : समय के साथ आप शरीर में नई उर्जा का प्रसार महसूस करेंगे। यह प्रक्रिया आपकी सेहत बेहतर करने तथा जीवनशैली में संतुलन लाने में मदद करेगी।

 

 

पंचकर्म के बाद फिर से पुरानी जीवनशैली में न चले जाएं, संकल्प लें और जीवन में सकरात्मक बदलाव लाएं।