शवासन से पाएं तनाव और डिप्रेशन से छुटकारा

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Image Credits: vyfhealth

शवासन देखने में बहुत आसान लगता है लेकिन सबसे मुश्किल आसनों में से एक माना जाता है। कई योगी जो मुश्किल से मुश्किल आसनों को बहुत ही लचीलेपन, ताकत और संतुलन के साथ कर पाते हैं, इस आराम की अवस्था में नहीं रह पाते। इसका एक आसान सा कारण है- आराम कोशिश से नहीं होता। अगर आप यह समझ लें तो आराम एक तोहफे की तरह नज़र आने लगेगा। शवासन ध्यान में जाने के लिए आदर्श आसन है।

शुरुआत में कई विद्यार्थी लेटे हुए छत की ओर ताकते हैं वहीँ अन्य को लेटते ही नींद आ जाती है। पर धीरे धीरे आप इसका महत्व समझ जाते हैं। रोज़ाना आप इस आसन में शरीर के हर हिस्से को एक एक कर ढीला छोड़ते हैं और आराम की अवस्था में जाते हैं। पर अगर आप लम्बे समय से शरीर में तनाव को बढ़ने दे रहे हैं तो शुरुआत में यह बहुत ही मुश्किल लग सकता है। बस कोशिश करें और साँसों को बिना किसी रोक के चलने दें।

शवासन का अभ्यास आपको ये मुख्य लाभ दे सकता है-

  • शरीर से तनाव घटाना
  • नींद गहरी करना
  • मन को शांत और केंद्रित करना
  • अवसाद और चिंता दूर करना
  • ध्यान लगाने में आसानी होना
  • परेशान कर रहे विचारों से मुक्ति
  • अवचेतन मन को आराम देना
  • उल्लास और आत्मविश्वास बढ़ाना

तो आइये जानें शवासन कैसे किया जाता है –

पहले अपने पैर और कमर को आराम दें

  • अपनी चटाई को एक चेयर के पास रखें
  • घुटने मोड़कर चटाई पर लेटें।
  • पैरों को उठाकर टखनों को चेयर पर रखें।
  • अपनी कमर को आराम दें तथा हथेली को छत की ओर खुला रखें।
  • इस अवस्था में कुछ देर गहरी साँसें लें और कमर को आराम देने की कोशिश करें।

छाती को आराम देकर सांस गहरी करें 

  • कुछ कम्बलों को मोड़कर अपनी कमर और गर्दन के नीचे रखें।
  • चटाई को बिछाकर इसपर घुटने मोड़कर लेटें।
  • एक एक कर पैरों को सीधा करें।
  • दोनों पैरों को कुछ दुरी पर इस तरह रखें की ये शरीर की मध्य रेखा से एक समान दुरी पर हों।
  • हाथों को दोनों तरफ ज़मीन पर रखें। उँगलियों और हथेली को ढीला छोड़ दें।
  • छाती पर ध्यान दें और इसे ढीला छोड़ दें।
  • साँसों पर ध्यान दें।
  • कुछ मिनट तक साँसों से फेफड़ों के भरने और खाली होने की प्रक्रिया पर ध्यान दें।

शवासन

  • अपनी पीठ के बल लेट जाएँ।
  • सर को मध्य में रखें।
  • हाथों को दोनों तरफ फैलाएं।
  • अपनी साँसों पर ध्यान लगाएं। धीरे धीरे अपने सिर, चेहरे, गर्दन, कंधे, बाज़ू, हाथ, छाती, पीठ, कमर, पेट, कूल्हे, जांघ और पैरों को ढीला छोड़ते जाएं।
  •  मन को शांत होने दें। अभ्यास करते रहने पर आप शरीर से अलग एक हल्कापन महसूस करेंगे।