अपने आप को स्वीकार करें और जल्द ही अपने लक्ष्य को पाएं 

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Image Credits: Amanda Stokes

हम सभी में एक बात समान है- हम अपने बारे में कुछ बातें बिलकुल पसंद नहीं करते। अक्सर एक लम्बी सूचि में हम वो सभी बाते लिखते हैं जिन्हें हम अपने अंदर बदलना चाहते हैं; कुछ किलो कम वजन, कुछ ज्यादा सुगठित मांसपेशियां, बदली हुई रंगत, बेहतर जॉब या उठने-बैठने-चलने का तरीका।

दरअसल यह इंसान की एक मुलभुत ज़रूरत है। मेस्लो नाम के एक वैज्ञानिक ने हमारी ज़रूरतों के उपर शोध कर पाया की “जो हम हैं उससे ज्यादा और बेहतर बनने की इच्छा, जो बन सकते हैं वो सब बनने की कोशिश” ही हमारी परम ज़रूरत है। पर इस लक्ष्य का पीछा करना जितना सही है, उतना ही ज़रूरी है सही रास्ता चुनना।

अक्सर हम बेहतर होने की कोशिश में अपनी कमजोरियों पर अत्यधिक ध्यान देने लगते हैं तथा अपनी खूबियों को भूल जाते हैं। कई मामलों में हमारे आस पास का वातावरण भी हमें अपनी खूबियों को पहचानने नहीं देता। पर क्या यह तरीका एक दुखद जीवन का मंत्र नहीं है?

हम सभी में कोई न कोई खूबी है। इसी समय रुककर अपनी आँखें बंद करें और अपनी खूबियों को याद करें। खुद से कुछ सवाल पूछें-

  • आपकी तीन शारीरिक खूबियाँ क्या है?
  • आखरी बार आपको कब तारीफ़ मिली थी?
  • वो कौनसी एक कमी है जिसे आपने पिछले साल में सुधारा है?

इन सवालों के साथ ही आप ऐसे क्षेत्र में प्रवेश करेंगे जहाँ आप अपने बारे में संतुलित नजरिया बना पाएंगे। यहाँ से आगे प्रगति का रास्ता और भी आसान हो सकता है।

बेहतर बनने की कोशिश करें, श्रेष्ठ नहीं 

अपनी खामियों और खूबियों को अपनाने के बाद आपको यह भी मानना होगा की अपनी कमियों को खत्म करने में आपको लम्बा समय लग सकता है। इस बात को मन में रखें तथा खुद से कहें की चाहे जो हो आप कोशिश करते रहेंगे। अक्सर हम बेहतरी के लिए कई लक्ष्य बनाते हैं लेकिन इनमें लगने वाली मेहनत का सही अंदाज़ा नहीं लगा पाते। ऐसे में छोटी सी मुश्किल भी आपको डरा सकती है। ऐसी सम्भावना को खत्म करें।

इस दुनिया में आपपर आपसे ज्यादा कोई भरोसा न करे 

खुद की क्षमताओं पर भरोसा करना, चाहे दुनिया हमें लगातार बताती रहे की विजेता बनते नहीं, पैदा होते हैं, कई बार मुश्किल हो सकता है। कई बार लाख कोशिशों के बाद भी खुद में कमी पाना हिम्मत तोड़ सकता है। लेकिन ऐसे समय में भी याद रखें की सफलता का बीज आपके अंदर मौजूद है। एक लक्ष्य पर ध्यान रखें और उसकी ओर बढ़ते हुए हर जीत का जश्न मनाएं। ऐसा करना आपको कभी हारने नहीं देगा।

खुद से बात करें 

हम सभी लगातार खुद से बात करते रहते हैं। पर यह बात अक्सर नकरात्मक टिप्पणी और निराशा से भरी होती है। इस बात में बदलाव लाएं। सचेत रहते हुए उस समय खुद को देखें जब आप खुद को नकरात्मक बातें कह रहे हों। इस समय विचारों को सकरात्मक दिशा दें। डर महसूस होने पर निडर होने की चाह रखें। गलती होने पर इसे स्वीकारने और सुधारने की चाह रखें।

हम सभी हमारे विचारों से बने हैं। आज से ही इन्हें बदलें और अपने जीवन में बदलाव होते हुए देखें।

खुद को स्वीकारने के चार चरण

  1. अपनी खूबियों पर ध्यान दें। कमियों पर नहीं। आपको मिले तोहफों को सहेजना और सराहना सीखें।
  2. प्रक्रिया पर भरोसा करें। आज शुरुआत थोड़ी मुशील ज़रूर लग सकती है लेकिन समय के साथ बेहतरी अपने आप आएगी।
  3. अपने उपर भरोसा रखें। हमेशा खुद से सकरात्मक बातें करें।
  4. अपनी मेहनत और प्रगति की तारीफ़ करें। बदलाव मुश्किल होता है लेकिन जब यह मुमकिन हो तो सभी सम्भावनाएं मुमकिन हो जाती हैं।