साइनस (Sinus) का उपचार करें इन आसान घरेलु उपायों से

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image credits: oralanswers.com

हमारे चेहरे पर नाक के आसपास कई प्रकार के छिद्र होते हैं, इन छिद्रों को साइनस (sinus) कहा जाता है। जब इन छोटे-छोटे छिद्रों में संक्रमण हो जाता है तो उसे साइनसाइटिस या साइनस ही कह दिया जाता है।

 

जब किसी शख्स को साइनस की दिक्कत होती है तो-

नाक से बलगम बाहर नहीं आ पाना, नाक तथा दोनों आंखों के बीच एक दर्द तथा दबाव, मुख्यतः ऑख और माथे पर दर्द, बंद नाक, नाक से पीला या हरे रंग का रेशा गिरना।

याद रहे झूकने और लेटने से यह दर्द और भी ज्यादा बढ़ जाता है। कभी कभी तो इसका अटैक इतना बढ़ जाता है की इसके दर्द से बुखार और चेहरे पर सूजन आ जाती है।

 

आइये हम देखें कि साइनस के उपचार के लिए कौन-कौन से प्राकृतिक उपाय हैं जिन्हें करने से हमें फायदा हो सकता है-

 

1. हमें हमारे नाक की नली को हमेशा नम रखना चाहिए। इसके लिए हमें वाष्प (Vapouriser) का नियमित रूप से उपयोग करना चाहिए। आजकल वाष्प लेने के सुविधाजनक यंत्र बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं।

 

2. कई प्रकार के रासायनिक पदार्थ, सुगंधित इत्र का इस्तेमाल करने से साइनस के लक्षण और भी बुरी तरह से बढ जाते हैं। सिगरेट के धुँए के कारण भी नाक की नली में धुंआ जाने से काफी परेशानी हो सकती है। अतः हमें इन चीजों के उपयोग से बचना चाहिए।

 

3. नेती बरतन (Neti Pot) के द्वारा हमारे साइनस (Sinus) को दूर होने में काफी सहायता मिलती है। इस नेती बरतन में हमें गुनगुने पानी में नमक और थोडी सी बेकिंग सोडा डालकर तैयार किया हुआ मिश्रण डालना है। उसके पश्चात उस बरतन के द्वारा धीरे धीरे हमारे नासिका छिद्र में वह पानी डालकर बाहर निकालना है। ऐसा करने से हमारे नाक की नली का दबाव काफी कम होने लगता है। पर हमें नेती बरतन को इस्तेमाल करते वक्त 2 चीजों का ध्यान रखना चाहिए।

 

क) हमेशा उबला, साफ और छने हुए पानी का उपयोग करना चाहिए।

ख) हर बार उपयोग में लाने के बाद नेती बरतन को अच्छी तरह धोकर खुली हवा में सुखाना चाहिए।

 

 

4. साइनस होने पर हमें अधिकतम मात्रा में पेय पदार्थों का सेवन करना चाहिए। जैसे गर्म चाय, कॉफी, सूप इत्यादि। पेय पदार्थों का सेवन करने से नाक की नली में आया हुआ दबाव और सूजन कम होने में मदद मिलती है। और हमारा सरदर्द भी कम होने लगता है।

 

5. साइनस होने के सबसे महत्वपूर्ण कारण है नसिका ग्रंथि में सूजन आना जिसकी वजह से अन्य संवेदनशील भागों में भी दबाव और दर्द होता है। हमारे नसिका नली में गाढा बलगम जमा होने की वजह से हमें काफी परेशानी होती है। इसलिए बलगम का पतला होकर बाहर आना बहुत ही आवश्यक है।

इसका भी एक उत्तम और सरल उपाय है- अगर हम गुनगुने पानी में भीगा हुआ तौलिया अपनी आँखों पर तथा नाक पर रखें तो नसिका नली में उष्णता पहुँचती है तथा हमें काफी राहत महसूस होने लगती है। हम यदि वैकल्पिक रूप से गर्म तथा ठंडे पानी में भीगा हुआ तौलिया अपनी आँखों और नाक पर रखें तो हमें काफी फायदा होता है। यह क्रिया हमें दिन में कम से कम 4 बार अवश्य करनी चाहिए।

 

6. साइनस की परेशानी को दूर करनें में दीर्घश्वसनक्रिया, विश्रांती, हल्का-फुल्का व्यायाम तथा योगक्रिया का काफी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। यह करने से हमें लगातार साइनस की तकलीफ तथा उससे होनेवाले जीर्ण दर्द में काफी आराम मिलता है।

 

7. अगर हम कुछ मसालेदार खाद्य-पदार्थ का सेवन करते हैं जैसे कि काली मिर्च या किसी अन्य ज्यादा तीखे पदार्थ से, तो ऐसा करने से हमारी आँखों और नाक से पानी निकलने लगता है नसिका ग्रंथि को खुलने में आसानी होती है और हमें काफी हद तक आराम मिलता है।

 

इस तरह हमने कई प्राकृतिक उपायों के बारे में देखा जो हमारे साइनस की परेशानी को दूर करने में काफी फायदेमंद हो सकते हैं। लेकिन इन प्राकृतिक उपायों का पालन करना सिर्फ तभी ही उचित है यदि आपको थोडा-सा दर्द, मामुली सर्दी या एलर्जी है। पर अगर आपको असहनीय दर्द है, कमजोरी है, बुखार नहीं उतर रहा है तो ऐसी स्थिती में आपको अवश्य ही अपने डॉक्टर से सलाह लेनी होगी।