सभी योगों का एक योग – सूर्य नमस्कार

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image caption: http://s1.firstpost.in/

योग की परम्परा में माना जाता है की अगर दिन सांस लेने जैसा और रात सांस छोड़ने जैसी हो तो भोर और शाम कुम्भक की तरह होता है जो ध्यान, चिंतन और योग का श्रेष्ठ समय है। इसी विचार को महत्व देने के लिए सूर्यनमस्कार का गठन हुआ जो अपने आप में एक पूरा व्यायाम है। (surya namaskar yoga images step by step)

सूर्य नमस्कार का अभ्यास आपकी मांसपेशियों को सुगठित बनाता है, अंगों का मर्दन करता है, मेटाबोलिज्म दुरुस्त करता है तथा वजन नियन्त्रण में रखता है। रोजाना इसका अभ्यास 15 मिनट करने से आप जल्द ही संतुलन और सेहत पा सकते हैं।

सूर्य नमस्कार के कई प्रकार हैं, जिनमें से हम सिर्फ एक से ही परिचित होते हैं जिसे खास नए योगियों के लिए बनाया गया है। अगर आप अनुभवी योगी हैं तो अपने अभ्यास को अगले चरण तक पहुँचाने के लिए सूर्य नमस्कार के इस रूप का अभ्यास करें-

 

शुरुआत: समस्थिति

सीधे खड़े हो जाएँ। आपके पंजे फैले हुए, दोनों पैरों पर बराबर वजन , रीढ़ सीधी और हाथ दोनों तरफ सीधे रखें। अगर आपको कमर, घुटने या पैर की तकलीफ की वजह से ऐसे खड़े रहने में तकलीफ रहती है तो आप पैरों के बीच कुछ दूरी भी बना सकते हैं।

  1. उत्कटासन -गहरी सांस लें

अपने घुटने मोड़ें, हाथों को ऊपर उठाकर सिर के ऊपर जोड़ें तथा अपने अंगूठों की ओर देखें।

  1. उतानासन -सांस छोड़ें

अपने पैर सीधे कर लें, सामने की ओर झुकें, दोनों हाथ नीचे पैर के पास ले आएं। गर्दन को ढीला छोडकर नाक की ओर देखें।

  1. उर्ध्व उतानासन -गहरी सांस भरें

अपनी पीठ को सीधा करें, सामने देखें, कंधों को खोलें तथा रीढ़ को सामने की ओर लम्बा करने की कोशिश करें।

  1. चतुरंग दण्डासन-सांस छोड़ें

हाथ पर वज़न डालते हुए पैरों को पीछे की ओर उछालें या कदमताल करते हुए पीछे लेकर जाएँ। आपकी कोहनियाँ शरीर के दोनों बाजु से लगी हुई रहेंगी, अपने शरीर को नीचे करें। अगर आप इस आसन को नहीं कर पा रहे तो घुटनों को ज़मीन पर भी रख सकते हैं।

  1. उर्द्वः मुख स्वानासन-गहरी सांस भरें

पंजों को ज़मीन पर रख दें(पैर की उँगलियाँ शरीर की विपरीत दिशा में रहेंगी), छाती को ऊपर उठाएं। इस दौरान आपके घुटने भी ज़मीन के ऊपर उठेंगे। गर्दन ऊपर कर छत की ओर देखें।

6.अधो  मुख स्वानासन -सांस छोड़ें

पंजों को फिर से ज़मीन पर रखें, कूल्हों को हवा में उठाएं तथा नाभि की ओर देखें। अगर इस आसन में आने में मुश्किल हो रही हो तो पहले घुटनों पर आएं फिर पैरों को सीधा करें।

  1. विर्भाद्रसन– गहरी सांस भरें

अपने बाएँ पंजे को बाहर की ओर मोड़ें, दायें पैर को दोनों हाथों के बीच लाएं, हाथों को ऊपर उठाएं तथा धीरे-धीरे शरीर के उपरी हिस्से को भी ऊपर उठा लें। दोनों हाथों को सिर के ऊपर जोड़ लें तथा अंगूठे की ओर देखें। बाएँ पैर को सीधा रखें।

  1. चतुरंग दण्डासन – सांस छोड़ें

हथेलियों को ज़मीन पर दाएँ पंजे के दोनों ओर रखें। अब सीधे पैर को पीछे लेकर जाएँ तथा कोहनियों को मोड़ें।

  1. उर्द्वः मुख स्वानासन – गहरी सांस लें

पंजों को ज़मीन पर रख दें(पैर की उँगलियाँ शरीर की विपरीत दिशा में रहेंगी), छाती को ऊपर उठाएं। इस दौरान आपके घुटने भी ज़मीन के ऊपर उठेंगे। गर्दन ऊपर कर छत की ओर देखें।

  1. अधो मुख स्वानासन -सांस छोड़ें

पंजों को फिर से ज़मीन पर रखें, कूल्हों को हवा में उठाएं तथा नाभि की ओर देखें।

  1. विर्भाद्रसन -गहरी सांस लें

अपने दाएं पंजे को बाहर की ओर मोड़ें, बाएँ पैर को दोनों हाथों के बीच लाएं, हाथों को ऊपर उठाएं तथा धीरे-धीरे शरीर के उपरी हिस्से को भी ऊपर उठा लें। दोनों हाथों को सिर के ऊपर जोड़ लें तथा अंगूठे की ओर देखें। दाएं पैर को सीधा रखें।

  1. चतुरंग दण्डासन-सांस छोड़ें

हाथ पर वज़न डालते हुए पैरों को पीछे की ओर उछालें या कदमताल करते हुए पीछे लेकर जाएँ। आपकी कोहनियाँ शरीर के दोनों बाजु से लगी हुई रहेंगी, अपने शरीर को नीचे करें।

  1. उर्ध्व मुख स्वानासन -गहरी सांस भरें

पंजों को ज़मीन पर रख दें, छाती को ऊपर उठाएं। इस दौरान आपके घुटने भी ज़मीन के ऊपर उठेंगे। गर्दन ऊपर कर छत की ओर देखें।

  1. अधो मुख स्वानासन -सांस छोड़ें

पंजों को फिर से ज़मीन पर रखें, कूल्हों को हवा में उठाएं तथा नाभि की ओर देखें।

  1. उर्ध्व उतानासन -गहरी सांस भरें

अपनी पीठ को सीधा करें, सामने देखें, कंधों को खोलें तथा रीढ़ को सामने की ओर लम्बा करने की कोशिश करें।

  1. उतानासन -सांस छोड़ें

अपने पैर सीधे कर लें, सामने की ओर झुकें, दोनों हाथ नीचे पैर के पास ले आएं। गर्दन को ढीला छोडकर नाक की ओर देखें।

  1. उत्कटासन -गहरी सांस लें

अपने घुटने मोड़ें, हाथों को ऊपर उठाकर सिर के ऊपर जोड़ें तथा अपने अंगूठों की ओर देखें।

  1. समस्थिति -सांस छोड़ें

पैरों को सीधा करें तथा हाथों को नीचे ले आएं।