तक्र : स्वास्थ्य के लिए अमृत

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तक्र आयुर्वेद में बहुत प्रभावी माना जाने वाला पेय है। आयुर्वेद के अनुसार इस पेय को सही मात्रा में लेने से आयु लम्बी होती है, रोगों से बचाव होता है, लगभग 100 भिन्न बीमारियों का इलाज होता है तथा बढ़ती उम्र के लक्षण से निजात मिलती है।

भावप्रक्ष ग्रन्थ के अनुसार “वह जो तक्र का रोज़ाना उपयोग करता है, रोगों से नहीं घिरता तथा तक्र से ठीक हुए रोग दोबारा नहीं आते। देवों के लिए अमृत की तरह ही तक्र मनुष्य के लिए है। ”

लाभ 

तक्र को रोज़ाना पीने से आप इसके अग्नि दीपक और त्रिदोष शामक गुणों के कारण स्वस्थ रहते हैं। इसका उपयोग अपच, ट्यूमर, एनीमिया, दस्त, मूत्राशय से जुड़े रोग आदि में किया जाता है। तक्र हमारे शरीर में प्रवाह की नलियां, जिन्हें स्रोत भी कहते हैं, को साफ़ करता है जिससे शरीर के हर हिस्से की कोशिका तक पोषण पहुँच सके।

तक्र को कैसे तैयार किया जाता है? आइये जानें-

विधि 

एक गिलास के पांचवे हिस्से में ताज़ा दही डालें। इसके बाकी 4/5 वे हिस्से में पानी डालें। इस मिश्रण को अच्छी तरह मथें। अगर आपके पास मथने के उपकरण मौजूद नहीं हैं तो इस मिश्रण को एक बोतल में भरें तथा इसका ढक्क्न लगाकर कुछ मिनटों के लिए इसे अच्छी तरह हिलाएं। आप देखेंगे की पेय के ऊपर मक्खन जम गया है। अगर आपका पाचन बहुत कमज़ोर है तो इस मक्खन को हटा दें।

ब्लेंडर में इस पेय को बनाने से इसके गुण बदल जाते हैं। आप दोनों तरह से तैयार पेय को पीकर फर्क देख सकते हैं।

उपयोग 

पाचन दुरुस्त करने तथा सामान्य लाभ पाने के लिए तक्र को सुबह नाश्ते में पियें। अगर आप इसे रोग के उपचार के लिए पी रहे हैं तो चिकित्सक से परामर्श लें।