अपने जीवन को बेहतर करने का सबसे तेज़ तरीका : हराजुकु

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टिम फेरिस अपनी फोर ऑवर बुक सीरीज के लिए प्रचलित हैं। इन किताबों में वे उन तरीकों का ज़िक्र करते हैं जिनके द्वारा आप हर हफ्ते सिर्फ चार घंटे देकर उन लक्ष्यों को पा सकते हैं जिन्हें अन्य लोग 60 से 70 घंटे देकर भी नहीं पा पाते। टिम की फोर ऑवर वर्क वीक इनमें सबसे ज़्यादा प्रचलित है।

फोर ऑवर बॉडी में टिम शरीर को काम समय में ज़्यादा फिट रखने के तरीके बताते हैं। इस किताब का एक पाठ बेहद दिलचस्प है- हराजुकु मोमेंट। इन शब्दों का मतलब समझाते हुए टिम बताते हैं की वह क्षण जब आप यह जान जाते हैं की अब आपके जीवन में कुछ बदलाव होना चाहिए, बड़ा बदलाव और वो भी जल्द से जल्द, को ही हराजुकु कहा जाता है। इसी क्षण के बाद आप अपने कार्य और जीवनशैली में बड़े बदलाव लाने के लिए तत्पर हो जाते हैं। पर इस क्षण तक कैसे पहुंचा जाता है?

जीवन सरल करें

हम अक्सर अपने जीवन में एक कार्य से दूसरे कार्य की ओर भागते रहते हैं लेकिन सामने रखे काम की तरफ पूरा ध्यान नहीं देते। अक्सर अपना काम हम इतना बढ़ा लेते हैं की संतुलन बनाना तक मुश्किल हो जाता है, काम पर ध्यान देना तो दूर की बात है। हम सभी में महत्वकांशा है लेकिन लक्ष्यों तक पहुँचने के लिए निश्चय से भरपूर कर्म करने की चेष्टा नहीं।

ध्यान दें

हम सभी व्यस्त हैं, लेकिन कुछ कर पाने के लिए हमें कार्य पर ध्यान की आदत डालना ज़रूरी है, खासकर जब यह पोषण और सीख से जुड़े कार्य हों। हराजुकु पल तक पहुँचने के लिए हमें अपनी तरफ और कार्यों की ओर पूरी सत्यता के साथ देखना होगा।

इंस्पिरेशन और मोटिवेशन के बीच फर्क समझें

इंस्पिरेशन (प्रेरणा) को अक्सर हम मोटिवेशन (अभिप्रेरण) के समान मान लेते हैं। इस फर्क को इस तरह समझें- एक छोटे बच्चे को एक चॉक्लेट देकर उससे आप कुछ देर के लिए मन चाहा काम करवा सकते हैं; इस तरह आप उसे मोटीवेट कर रहे हैं। लेकिन एक पढ़ा लिखा व्यक्ति, जिसने मेहनत कर अपने वज़न घटाया है, डायबिटीज कण्ट्रोल किया है तथा दवाओं की ज़रूरत खत्म की है, को अगर आप यही चॉक्लेट देकर काम करवाना चाहें तो यह तरीका काम नहीं करेगा; वह अपने स्वास्थ्य के लिए इंस्पायर्ड है और छोटे लालचों में नहीं पड़ने वाला है।

ज़िम्मेदारी लें

इंस्पिरेशन अंदरूनी कारकों पर निर्भर करता है तथा दूसरों पर आरोप डालने की जगह स्वयं ज़िम्मेदारी लेने के लिए आपको ऊर्जा देता है। जीवन में अक्सर असफलता का कारण सिर्फ एक होता है, की आपने अपने आप को सफलता से वंचित कर रखा है।

खुद को जवाब दें

तो आप किसके लिए रुके हैं? जीवन को सरल कर इसकी ज़िम्मेदारी लें। फिर कुछ देर बैठकर गहरी साँसें लें और खुद से उन सवालों को पूछें जिन्हें आप अधूरे मन से दिन भर खुद से पूछते रहते हैं। इन सवालों का जवाब ढूंढते हुए आपको प्रेरणा भी मिलेगी और हराजुकु भी।

ध्यान रखें, किसी भी कार्य में अतुल्य बनने का रहस्य यही है, अतुल्य बनने का मन बना लेना।