इस तरह बचें गर्मी के प्रकोप – हाइपरथर्मिया से

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हाइपरथर्मिया या हीट स्ट्रोक में अत्यधिक गर्मी की वजह से शरीर का तापमान सामान्य से बहुत बढ़ जाता है। अक्सर यह समस्या तेज़ धुप या गर्मी में बहुत थका देने वाले काम करने से होती है।

आइये इसके बारे में कुछ अहम बाते जानें-

 

हाइपरथर्मिया क्या है?

हाइपरथर्मिया एक अवस्था है जिसमें शरीर का तापमान सामान्य स्तर जो की 98.6 F है, से बढ़ जाता है। यह ज्वर जैसा प्रतीत होता है पर मूल रूप से अलग है। जब हम बीमार होते हैं तो शरीर का ताप बढ़ता है। यह बुखार शरीर से संक्रमण को खत्म करता है और इस तरह बीमारी से लड़ने में शरीर की मदद करता है। वहीं दूसरी ओर हाइपरथर्मिया तब होता है जब शरीर में गर्मी इतनी बढ़ जाती की शरीर को ठंडक प्रदान करने वाला तंत्र भी विफल हो जाता है।

 

जब हमारे शरीर में गर्मी बढ़ती है तो पसीने के द्वारा शरीर स्वयं को ठंडा रखता है। जब यह क्रिया भी असर नहीं कर पाती तो हाइपरथर्मिया हो जाता है। इसी के उलट अत्यधिक ठंड होने पर हाइपोथर्मिया होता है।

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हाइपरथर्मिया के कारण –

हाइपरथर्मिया का मुख्य कारण तेज़ धुप में अत्यधिक मेहनत करना है। हालाँकि कुछ मामलों में दवाई के दुष्प्रभाव होने पर या किसी खास बीमारी में भी हाइपरथर्मिया के लक्षण देखे जाते हैं।

हाइपरथर्मिया की समस्या को कैंसर के उपचार में उपयोग किये जाने वाले हाइपरथर्मिया से नहीं जोड़ना चाहिए जिसमे शरीर के तापमान को बढ़ाकर संक्रमित कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।

 

हाइपरथर्मिया के लक्षण-

हाइपरथर्मिया के मुख्य लक्षण इस प्रकार है-

  • पेट दर्द या मरोड़
  • मांसपेशियों में ऐठन
  • उल्टी होना
  • सिरदर्द होना
  • चक्कर आना
  • बहुत ज़्यादा या थोड़ा पसीना आना

अक्सर कुछ मानसिक लक्षण भी देखे जाते हैं जैसे-

  • अजीब व्यवहार
  • चिड़चिड़ाहट
  • भ्रम
  • कोमा

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उपचार-

हाइपरथर्मिया के उपचार में सबसे पहले शरीर के ताप को सामान्य करना ज़रूरी है। कसे हुए कपड़े ढीले कर दें और अतिरिक्त कपड़ो को हटा दें। रोगी पर पानी का हल्का छिड़काव करें, पंखा या कूलर की मदद से ठंडी हवा दें या गीले कपड़ो से लपेटें। कांख, गर्दन और नाभि के नीचे बर्फ के टुकड़े भी रखे जा सकते हैं।

अगर यह उपाय शरीर को ठंडा न कर पाए तो बिना देर किये चिकित्सक की सलाह लें। अक्सर चिकित्सक शरीर को अंदर से ठंडा करने के लिए पेट को पानी से फ्लश करते हैं। गंभीर मामलों में कार्डिओ पल्मोनरी बाईपास के ज़रिये शरीर के रक्त को दिल और फेफड़ों में जाने से पहले एक मशीन से गुज़ारकर ठंडा किया जाता है।

चिकित्सक आपको मांसपेशियों में तनाव कम करने के लिए दवाई भी दे सकते हैं। बुखार में ली जाने वाली एस्पिरिन या टीलेनोल जैसी दवाईयों को हीट स्ट्रोक में बिलकुल नहीं लिया जाना चाहिए।

अक्सर हाइपरथर्मिया होने पर रोगी को हॉस्पिटलाइज किया जाता है ताकि किडनी या मांसपेशियों को हुए नुकसान को जांचा जा सके।

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हाइपरथर्मिया से कैसे बचें?

ज़्यादातर मामलो में इन उपायों से हाइपरथर्मिया से बचा जा सकता है –

  • दिन भर में भरपूर पानी पीते रहें; प्यास लगने का इंतज़ार न करें।
  • ज़्यादा गर्म महसूस होने पर घर के अंदर ठंडी हवा में रहें।
  • हल्के रंग के आरामदायक कपड़े पहनें।
  • दिन में 10 से 4 के बीच थकाने वाले काम से दूर रहें। अगर काम टालना सम्भव न हो तो थोड़ी-थोड़ी देर में आराम करें और हेलमेट, भारी यूनिफार्म आदि को पहनने से बचें।
  • चाय, कॉफ़ी, चॉक्लेट, कोक जैसे कैफीन युक्त पेय और शराब शरीर में पानी की कमी करती हैं इसलिए इन्हे पीने से बचें। आइस्ड टी जैसे बेहतर विकल्प चुनें।

चक्कर जैसा लगने या थकान लगने पर जल्द गर्म जगह से दूर हो जाएँ। अगर उल्टियाँ या चक्कर आने लगे तो जल्द चिकित्सक से परामर्श लें और हाइपरथर्मिया को बिगड़ने से रोकें।