क्या योग किसी वर्कआउट से ज्यादा है?

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image credits: Personal Fitness Trainer in Mumbai

भारत में हुए महान ऋषि और प्राचीन ग्रंथ द्वारा हुई योग की चर्चा यह बताने के लिए काफी है की योग सिर्फ शारीरिक कसरत नहीं है। यह एक मानसिक और आध्यात्मिक क्रिया भी है जिसके कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ होते हैं। (which is better yoga compared to, versus, vs physical, cardio exercise in hindi) फिर भी, कई बार हम इसे “बीच बॉडी” या “सिक्स पैक” पाने की लालसा में सिर्फ शारीरिक कसरत मान लेते हैं और अभ्यास में गलतियाँ कर बैठते हैं।

 

इसलिए आइये हम जानें की कैसे योग कई स्तरों पर कार्य करता है –

 

योग संतुलन का ही नाम है 

शरीर के बेहतर संतुलन व हाथोंं की मजबूती के लिए कीजिए भुजपीड़ासन योग

योग एक अभ्यास है जिसमें हम स्नायु तन्त्र को तनाव रहित करते हैं तथा संतुलन लाते हैं। इसलिए योगाभ्यास करते हुए आप किसी आसन की मुद्रा में आने को जितना महत्व देते हैं, उसमें रुके रहकर सहजता लाने को भी देना उतना ही महत्व देना चाहिए।

अक्सर हम एक आसन को करते हुए अगले आसन के बारे में सोचने लगते हैं या फिर दिनचर्या को दिमाग में रखते हैं। आपके तनावपूर्ण जीवन के साथ जब आप मुश्किल व्यायाम कर रहे होते हैं तो इससे शरीर में तापमान बढ़ता है और रक्तचाप तेज़ी से बढने लगता है। यह शरीर के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है और शरीर को मजबूत करने की जगह कमजोर कर सकता है ।

योग आपके स्नायु तन्त्र को तनाव रहित कर दिनचर्या के दुष्प्रभावों से बचा सकता है। यह व्यायाम और आराम का अदभुत मेल है जिसे क्षणों का आनंद लेते हुए किया जाना चाहिए।

एकाग्रता व ध्यान बढ़ाने के लिए कीजिए कीर्तन ध्यानक्रिया

आपका ध्यान अंदर की ओर लेकर जाता है 

योग में आप लगातार अपना ध्यान मस्तिष्क की गहराइयों में ले जाने की कोशिश करते हैं। श्वास, मुद्रा, ध्यान और दृष्टि सभी अंदर की ओर चेतना ले जाने के लिए ही हैं। अगर आप योग का अभ्यास किसी बाहरी लक्ष्य को दिमाग में रखकर कर भी रहे हैं, तो ये क्रियाएँ आपका नजरिया बदलने और सही लक्ष्य निर्धारित करने में मदद करेगी।

योग का समय भले ही आप घंटों या लक्ष्यों में तय कर दें, पर इसका अभ्यास करते हुए आपके लिए इन सभी का महत्व खत्म होने लगता है। आप शांत, स्थिर और अन्तर्मुखी हो जाते हैं।

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योग के शारीरिक लाभों में लचीलापन, संतुलन और श्वास की गहराई भी शामिल है 

हम में से ज्यादातर लोग वर्कआउट को तेज़ धडकन, पसीना और मेहनत से जोड़कर देखते हैं। लेकर योग के किसी भी प्रकार का अभ्यास करने पर आप जानेंगे की शरीर का लचीलापन और साँसों की गहराई भी कितनी ज़रूरी है। इनके द्वारा आपके शरीर में रक्तप्रवाह सुगम और तेज़ होता है जिससे हर कोशिका सेहतमंद होती जाती है। यह शरीर में अत्यधिक गर्मी पैदा किए बिना आपको लम्बी उम्र दे सकता है।

योग के अभ्यास से आप जानेंगे की यह अन्य किसी भी वर्कआउट योजना से ज्यादा समग्र है और आपको अभ्यास के अंत में थका हुआ महसूस नहीं कराता बल्कि उर्जावान बनाता है।

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श्वास 

योग का एक और लाभ यह है की आप अपनी साँसों की ओर सचेत हो जाते हैं। रोजाना हम 17 हज़ार बार सांस लेते हैं लेकिन इस बेहद महत्वपूर्ण क्रिया पर ध्यान नहीं देते। पर अगर आप गौर करेंगे, तो पाएँगे की हर वातावरण और हर मनोदशा के अनुसार आपकी साँसों में परिवर्तन आता रहता है तथा इसके प्रति सचेत होने से आप खुद को बेहतर रूप से समझ पाते हैं। अगर आप अक्सर तनावग्रस्त रहते हैं तो आपकी साँसें इस क्षण में आपको उथली और तेज़ लगेंगी। आप पाएँगे की आप सांस तो ले रहे हैं लेकिन उर्जा से भरा महसूस नहीं कर रहे। योग का अभ्यास आपको साँसों पर नियन्त्रण देगा जिससे आप अपनी उर्जा और मनोदशा तक हो नियंत्रित कर पाएँगे।

 

योग आपके मन की एक दशा 

ध्यान में वृद्धि व शांत मन के लिए करें कुम्भक प्राणायाम

योग के प्राचीन ग्रन्थों में महर्षि पतंजली कहते हैं- योग मन के उतार-चढ़ावों को शांत करना ही है। यह आपके शरीर द्वारा किए जाने वाला काम नहीं, बल्कि मन द्वारा भी किया जाता है।

इसी समय कुछ देर के लिए एक जगह बैठें, आँखें बंद करें और उन क्षणों के बारे में सोचें जो आपको बहुत सुखद लगते हैं। आप पाएँगे की ऐसे क्षणों में आप पूरी तरह सचेत और उर्जावान रहते हैं। यही योग भी करता है- यह आपके मन को शांत कर वर्तमान में लाता है जिससे आप ख़ुशी, स्वतंत्रता और ठहराव महसूस करते हैं।