छाती, फेफड़ों और कंधों के आस-पास के हिस्से को खोले चमत्कारासन योग

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chamatkarasana
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हर व्यक्ति के जीवन में चमत्कार के अलग मायने हैं। किसी के लिए यह एक पौधे का उगना चमत्कार हो सकता है तो किसी के लिए टोपी से खरगोश निकलना। हाथ की सफाई और करामात से होने वाले चमत्कार आपके लिए किसी फायदे के हो या न हों, लेकिन योग का चमत्कार आपके लिए बहुत कुछ हो सकता है। जानें कैसे चमत्कारासन आपके मन में प्रफुल्लता ला कर परमानन्द की अनुभूति करवा सकता है-

 

  1. अधो मुख स्वनासन से शुरुआत करें।
  2. अपने वजन को सीधे हाथ पर डालें तथा वशिष्ठासन की तरह सीधे पैर के बहरी हिस्से पर आ जाएँ।
  3. गहरी सांस भरें और कूल्हों को हवा में उठाएं। अपनी हथेली को मजबूती से ज़मीन पर फैलाएं।
  4. सांस छोड़ते हुए अपने बाएँ पैर को पीछे रखें तथा पैर की उँगलियों को ज़मीन पर रखें तथा घुटने को थोडा सा मोड़ें।
  5. पीठ के उपरी हिस्से को पीछे की और मोड़ें जिससे आपके कंधे पीछे की ओर सरकें।
  6. गहरी सांस भरें तथा अपने कूल्हों को तब तक उपर उठाएं जब तक आप पूरी क्षमता से पीठ के निचले हिस्से को न मोड़ लें।
  7. सांस लेते रहें तथा अपने सिर को पीछे की और झुकें। अपने बाएँ हाथ को बाहर की और फैलाएं तथा अपनी ताकत और आज़ादी महसूस करें।
  8. इस अवस्था में 5-10 गहरी साँसों के लिए रुकें फिर दोबारा स्वानासन में आ जाएँ।
  9. शरीर के दूसरी ओर के लिए यह क्रिया दोहराएं।

 

अगर आप कार्पेल टनल सिंड्रोम से ग्रसित हैं या कलाई की चोटों से परेशान हैं तो इस आसन का अभ्यास न करें

 

इस आसन को और भी आसानी से करने के लिए आप अधो मुख स्वनासन, धनुरासन और वशिष्ठासन का अभ्यास कर सकते हैं।

 

आइये जानते हैं चमत्कारासन के अभ्यास से आप कौनसे लाभ पा सकते हैं-

 

  • आलस से मुक्ति
  • हल्के अवसाद से छुटकारा
  • छाती, फेफड़ों और कंधों के आस-पास के हिस्से को खोले
  • पैर और कूल्हों के मांसपेशियों को खोले
  • कंधों और पीठ के ऊपरी हिस्से को मजबूती दे
  • शरीर को लचीला बनाए
  • अंदरूनी अंगों की मालिश करे
  • रक्त प्रवाह तेज़ करे

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