जानिए विभिन्न योग मुद्राएं तथा इनसे होने वाले शारीरिक लाभ

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image credits: India Yoga Guru

हमारा शरीर, इस ब्रम्हांड की तरह ही पंचतत्व से बना है। जब इनमे किसी तरह का असंतुलन पैदा होता है तो हमारा मन अशांत और शरीर बीमार होने लगता है। योग शास्त्र में इन तत्वों को संतुलित करने के लिए मुद्राएँ सुझाई गयी है। (yoga mudrasana images benefits steps for diabetes, headache, depression in hindi)

एक मुद्रा हाथ से बना आकार होती हैं जो उर्जा को दिमाग के विशिष्ट भागों में प्रवाहित करती है। इनके साथ प्राणायाम करने से शरीर में प्राणवायु का संचार होता है जिससे आप उर्जा भी पाते हैं। इन मुद्राओं का सही ज्ञान आपको अपने जीवन पर और नियन्त्रण दे सकता है।

 

अगर आप भी अपने योगाभ्यास को एक नया रुख देना चाहते हैं, तो इन मुद्राओं के बारे में ज़रूर जानें-

 

ज्ञान मुद्रा

यह मुद्रा मूलाधार चक्र (कमर के पास रीढ़ का आखरी छोर) को जागृत करती है जिससे तनाव और अवसाद खत्म हो जाता है। यह मुद्रा मन शांत करने और अध्यात्म के बीज बोने के लिए जानी जाती है। यह शरीर में वायु तत्व को संतुलित कर याददाश्त तेज़ करती है, मस्तिष्क को कुशल बनाती है तथा मानसिक रोगों से मुक्ति दिलाती है।

इस मुद्रा के अभ्यास कर लिए आप अपनी तर्जनी (अंगूठे के बाद वाली ऊँगली) को अंगूठे के छोर से छुएँ। यह सुबह 30-40 मिनट ध्यान के अभ्यास के लिए सही मुद्रा है।

 

वायु मुद्रा 

यह मुद्रा शरीर में वायु के असर को कम कर बेचैनी, घबराहट और अशांती को कम करती है। यह वात दोष को नियंत्रित कर आर्थराइटिस, गैस, साइटिका, गठिया वात, पेट फूलना आदि समस्याओं को कम करती है तथा मांसपेशियों को आराम देती है।

अपनी तर्जनी ऊँगली को मोड़ें तथा इसे अंगूठे से दबाएँ; बाकी उँगलियाँ सीधी रखें। इस मुद्रा का अभ्यास आप दिन में कभी भी कर सकते हैं तथा 45 मिनट तक कर सकते हैं।

 

प्राण मुद्रा 

प्राण जीवन की उर्जा को कहा जाता है। प्राण मुद्रा से आँखें स्वस्थ रहती हैं, शरीर को रोगों से लड़ने की शक्ति मिलती है, विटामिन्स की कमी दूर होती है तथा थकान कम होती है। यह आपको गहरी नींद और स्वस्थ अंग देने के लिए उचित मुद्रा है।

अनामिका(अंगूठी पहने जाने वाली ऊँगली) और कनिष्ठा(सबसे छोटी ऊँगली) के उपरी छोर को अंगूठे द्वारा छुएँ; बाकी दोनों उँगलियाँ सीधी रखें। आप इसके अभ्यास के साथ गहरी साँसें लेना या सो-हम का उच्चारण करना जैसी क्रियाएँ कर सकते हैं। रोजाना 30-40 मिनट इस मुद्रा का अभ्यास आपको लाभ देने के लिए काफी है।

 

शुन्य मुद्रा 

यह मुद्रा आकाश की है तथा शुन्यता/स्वर्ग को दर्शाती है। इसका रोजाना अभ्यास कान में दर्द, आँखों में पानी आना,ह्रदयरोग और गले के रोग से निजात दिला सकती है। इससे थाइरोइड के रोग ठीक होते हैं तथा मसूड़े स्वस्थ होते हैं। यह ह्रदय चक्र को खोलता है तथा ध्यान को सुगम बनाती है।

मध्यमा को इस तरह मोड़ें की यह अंगूठे के निचले हिस्से को छुएँ। अब अंगूठे को मध्यमा के ऊपर रखें तथा बाकी उँगलियों को सीधा करें। इस मुद्रा का अभ्यास 15 मिनट करने से आप लाभ पा सकते हैं।

 

अपान मुद्रा 

यह मुद्रा अपच, बवासीर, मधुमेह, किडनी के रोग और दांत के रोगों से आराम दे सकती है। यह शरीर से विषाक्त तत्वों को बाहर कर इसे स्वस्थ बनाती है।

इस मुद्रा के लिए मध्यमा और अनामिका को अंगूठे के छोर से छुएं तथा बाकी दोनों उँगलियों को सीधा रखें। रोजाना 45 मिनट का अभ्यास आपको लाभान्वित करेगा।